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घर की देवी को भूल गए हिन्दू ....(Slap on Women Empowerment)

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c A Women check her daughter after the serious injuries, because of dowry related Violence मैं भी हिन्दू हूँ, फिर भी मैंने यही शीर्षक लिखा क्योंकि ...... हमारे ही धर्म में दुर्गा,सरस्वती और लक्ष्मि माँ है ...हमारे ही धर्म में देवियो की पूजा होती है .......फिर भी मैं ये लिखने पर मज़बूर हूँ ऐसा नहीं है की ..बाकि धर्मो में ये शर्मनाक घटना नहीं होती है ....पर मैं जब अपने धर्म की तरफ देखता हूँ .....हमारे यहाँ देवियो को पूजा जाता है ..लेकिन दहेज़ के नाम पे जलाते भी है ....फिर तो हमें ..अपनी मान्यता बदल देनी चाहिए ..देवियो की पूजा बंद कर देनी चाहिए ....क्योंकि इसलिए हम खुद को बाकि धर्मो से अलग समझते है ...........इसलिए मैंने हिन्दू शब्द का उपयोग किया .......... कहने को मैं सभी को गलत कह सकता हूँ ..पर मुज़हे शरुवात पहले अपने घर से करनी होगी इसलिए मैंने हिन्दू शब्द कहा ... Marriage as a financial transaction         पाकिस्तान,बांग्लादेश ,ईरान और भी देशो में ये घटना होती है, लेकिन भारत में ये संख्या बढ़ रही है ..और देशो की तुलना में बहुत ज़्यादा है ... How Much is the...

बेटिया भी आजकल बेटियो की कातिल (When Daughter Killed Own Daughter)

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आज कल बहुत से ऐसे रिपोर्ट्स आती  है ,जब खुद माँ ने कोख में पल रही अपनी बेटियो को मर दिया होता है बेटो की चाह में ...ये समाज का एक ऐसा सच है जिसके बारे में सोचने से ही एक घुटन से होने लगती है ...जहाँ महिलाये आज अपने अस्तित्व के लिए लड़ रही है वाह एक महिला ही दूसरे की दुसमन बानी हुई है ....हम कह सकते है लडकिया अपने ससुराल के दबाव में बहुत बार बेटियो को कोख में मारती है पर कई बात बेटे की चाह भी एक माँ को अँधा बना देते है ... इसलिए मैंने ये शीर्षक चुना ..की कैसे कोई माँ ऐसा कर सकती है ... मुझे आज भी याद है , मैं पार्क की एक बेंच पे बैठा था ..और कुछ दूरी पर एक माँ अपने दो बच्चो के साथ बैठी थी ,उसमे एक लड़का औए एक बच्ची थी....बच्ची काफी देर से माँ को कुछ कह रही थी ...माँ उससे सुन के भी अनसुना कर रही थी ..मैंने सोचा आखिर वो कह क्या रही है ..तो मैंने जब सुना वो छोटी से बच्ची अपनी माँ से icecream  दिला को कह रही थी ..लेकिन माँ बार बार उससे मन कर रही थी ...तभी उनके बेटे ने icecream की मांग की माँ तुररंत लेने चली गयी ...और लाकर अपने बेटे के हाथ में दे दिया  और उससे अपना प्यार...

इस समाज से बदलाव की उम्मीद रखना महिलाओ के लिए सही या गलत ?

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जिस समाज में लोग अगर महिलाओ के  कपड़ो से उसके व्यक्तिव को आंकते है या वो अपने रात में कितने बजे घर आती है इस बात से..तो ऐसे समाज में अगर बदलाव भी आना होगा तो उसमे अभी शायद बहुत समय है .... आये दिन Delhi  या देश के अलग राज्यो में होने वाली घटनाये और उसके बाद राजनेताओ या और भी शिक्षित लोगो के आने वाले बयान और लोगो की मानसिकता ..जो ये कहती है की किसी लड़की ने या महिला के कपडे पहनने या देर से आने की वजह से ये घटना हुई है .....इस समाज के एक पिछड़े और काले चहरे को भी दर्शाती है .... शायद इस समाज में बदलाव जरूर आये , हमें उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए पर....यह Poster ,banner , internet कैंपेन या candle  मार्च से आ जाये ये मुश्किल लगता है .. महिलाये जब तक अपने सुरक्षा के लिए स्वयं कोई ठोस कदम नहीं उठाएंगे इस समाज में बदलाव नहीं आने वाला ....उन्हें स्वयं पहल करनी होगी ...स्वयं जागरूक होना होगा और अपने आस पास की छोटी बच्चियों को भी करना होगा ... आने वाली महिला पीढ़ी को शुरू से ही इन बातो का ध्यान रखना होगा ...अच्छी बात तो ये होगी अगर माँ बाप ही आपको घर के काम के साथ साथ ..स्वयं क...

क्यों महिलाये आज भी अपनी सुरक्षा के लिए दुसरो पर निर्भर है (Why women or girls always dependent on others for their safety issue)

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क्यों महिलाये आज भी अपनी सुरक्षा के लिए दुसरो पर निर्भर है .... इसकी सबसे बड़ी वजह स्वयं लडकिया ही है ...क्योंकि वो आज भी खुद को कमज़ोर और लाचार समझती है ,वो ये मनना ही नहीं चाहती की ...दुर्गा,सरस्वती के साथ कही नहीं कही उनमे काली भी है .... मैं लड़की हु में ये नहीं कर सकती या वो नहीं कर सकती, ऐसे ही बातो से उन्होंने अपने अंदर एक डर को बना रखा है... ज़रूरी है की महिलाये आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के साथ साथ अपने अंदर आत्मविश्वास लाये ..और वो अपनी सुरक्षा के लिए दुसरो पर निर्भर होना छोड़ दे ....क्योंकि जीवन के हर मोड़ पर ज़रूरी नहीं कोई आपके साथ हो ...या जब आप सड़को पर निकले तो कोई ज़रूरी नहीं है की ..कोई दोस्त या जान पहचान का व्यक्ति आपके साथ हो .....क्या हो अगर आप अकेले हो और कोई मुसीबत आ जाये ..इसलिए आपको अपनी सुरक्षा के विषय में स्वयं सोचना होगा ...आपको स्वयं ऐसे कदम उठाने होंगे जिससे आप किसी पर निर्भर न हो ....

In India for girls, the synonym that used by people is Goddess So, the Goddess is in danger (भारत में महिलाओ के साथ बढती घटनाये)

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In India for girls, the synonym that used by people is Goddess So, maybe our Goddess is in danger. हमारे देश में क्या सचमूच लड़कियों को देवी तुल्य समझा जाता है ,कुछ हद्द तक ये बात सही भी है क्योंकि हमारे देश में देवियो की पूजा होती ....पर अगर ऐसा होता तो , महिलाओ के प्रति आये दिन होने वाली घटनाये बढाती क्यों जाती ..... आये दिन हम सब लोग अखबारों में खबरे पढ़ते है चाहे वो ,छेड़छाड़ हो या वर्कप्लेस पे महिलाओ के संग होने वाली घटनाये..या रेप जैसी शर्मसार कर देने वाली घटनाये होती है ....या छोटी बच्चियों को पड़ोस या रास्ते से लेके उनके निर्णायक जगह तक होने वाली जो दिक्कत हो ....ये सब इस देश में हो रहा है ..जहाँ नवरात्र के दिन लोग छोटी बच्चियों या महिलाओ को देवी की तरह पूजते है ... ऐसा नहीं है की और देशो में ऐसे घटनाये नहीं होती  .....पर हमारे यहाँ ये बढ़ती ही जा रही..इसमें कमी नहीं आ रही है ....कुछ घटनाये जो दिल को दहला देने वाली थी ...जिसने हर किसी का सर शर्म से निचे झूका दिया..... क्यों लोग हमेसा लड़कियों को ही दोष देते है ...वो क्यों भूल जाते है की पीड़ित होने वाली लडकिया ...

We are the Hope against child Hunger, Right to Education and Health(हम सब है ..उम्मीद ना उम्मीद हो चुके उन हज़ारो परिवारों के लिए ,भूख ,आशिक्षा, कुपोषण से रोज़ लड़ते उन बच्चो के लिए )

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हम सब है ....उम्मीद ....ना उम्मीद हो चुके उन हज़ारो परिवारों के लिए ,भूख ,आशिक्षा, कुपोषण से रोज़ लड़ते उन बच्चो के लिए  ..... अगर हम चाहे तो क्या नहीं कर सकते है ...हम सब भारतीय जो शिक्षित है ..और दुसरो को जिन्हें नहीं ज्ञान उन्हें बहुत सी बाते बता सकते है ...उन बच्चो तक वो ज़रूरी ज्ञान पहुच सकते है जो उनके विकास के लिए ज़रूरी है ..वो हज़ारो ,लाखो बच्चे जो हमारे पडोश में सड़को पर छोटी बस्तियों में उम्मीद लगाए बैठे है कोई आएगा और उन्हें यहाँ से निकालेगा ... हम सब अपने लेवल पर कुछ योगदान ज़रूर कर सकते है ....इन नन्हे उम्मीद के दीपको के लिए ... ताकि ये पुरे जहाँ को रोशन कर सके ....और अपना जीवन बेहतर बना सके ... हमें सिर्फ पहल ही तो करनी है अपनी योग्यता अनुसार ..... मैं किसी को अपने योग्यता या कोई अतिरिक्त काम कर ने को नहीं कह रहा बस इतना आग्रह कर रहा हूं की आपके आस पास जो बच्चे है ..आप उन्हें एक समूह बनाके शिक्षित तो कर ही सकते है ...ये काम आखिर कितना  मुश्किल है ........अगर हमारा ज्ञान किसी के काम आ जाये तो इससे अच्छा क्या होगा ...चाहे हम हेल्थ से जुडी या शिक्षा स...

Street Children in India(सड़को पर सोता भारत )

Economy of India Statistics GDP $2.30 trillion (nominal; 2016) $8.72 trillion (PPP; 2016) GDP rank 6th (nominal) / 3rd (PPP) GDP growth 7.6% (2015-16) GDP per capital $1,718 (nominal; 2016) $6,658 (PPP; 2016) बच्चे तो अपने रेलवे स्टेशन,बस स्टैंड या ब्रिज के निचे या चौराहो के आस पास देखे ही होंगे ..उनमे से ज़्यादा वही रहते है वही सोते है ..कुछ शायद गांव से आते है पैसा कमाने और सड़को पे रहते है कुछ अपने परिवार के साथ वही रहते है ..... हम सब देखते तो है ही हर रोज़ .... आपको पता है सरकार ने अपने घोषणा पत्र में internet  और विफई फ्री करने की बात कही है Laptop भी बाटे गए है ...सब कुछ Digital भी हो रहा है ये भी अच्छा है भला हम America  और चीन से पीछे क्यों रहे .... लेकिन "हमारी  सरकार चाहे वो राज्य की हो या केंद्र की उसमे उन सड़क पे रहने वालो लोगो के लिए कोई योजना नहीं है"    उन लोगो को बेहतर घर या रोज़गार देने की कोई बात नहीं है ... ४०% - ११ से १५ साल के बच्चे  ३३% -  ६ से १० साल के बच्चे सड़को पे रहते है ... किसी भी तरह के she...